अलाउद्दीन खिलजी का विजय अभियान ( Alauddin Khilji ka Vijay Abhiyan)

अलाउद्दीन खिलजी का विजय अभियान (Alauddin Khilji ka Vijay Abhiyan)























































राज्य



शासक



वर्ष



खिलजी सरदार



विशेष /विवरण


गुजरातरायकरन बघेला (कर्ण)1298 ईस्वीउलूग और नुसरत खांगुजरात अभियान के मार्ग में जैसलमेर विजित किया कर्ण भाग गया |
रणथंभौरराणा हम्मीर देव (चौहान शासक)1301 ईस्वीउलूग खां और नुसरत खापहले राणा ने हमला विफल कर दिया और नुसरत खां मारा गया अब अलाउद्दीन स्वयं आया राजपूतों ने जौहर किया और हम्मीर युद्ध में मारा गया |
चित्तौड़रतन सिंह1303 ईस्वीअलाउद्दीन खिलजीचित्तौड पर अधिकार कर उसका नाम ‘खिज्राबाद’ रखा 1311ई. में चित्तौड़ मालदेव को सौंप दिया |
मालवामहलकदेव1305 ईस्वीआइन उल मुल्क मुल्तानीमहलक देव मांडू भाग गया और मालवा खिलजी साम्राज्य में मिल गया |
सिवानाशीतलदेव (परमार वंशीय)1308 ईस्वीकमालुद्दीन कुर्ग
जालौरकान्हदेव (कृष्णदेव)1311 ईस्वीकमालुद्दीन कुर्गशासक के भाई मालदेव को खुश होकर चित्तौड़ सौंपा |

दक्षिण भारत















































देवगिरीरामचंद्र देव (यादव शासक)1296 ईस्वीअलाउद्दीन खिलजीरामचंद्र देव ने एलिचपुर प्रांत की आय देने का वादा किया |
देवगिरीरामचंद्र देव1307 ईस्वीमलिक काफूररामचंद्र ने कर देना बंद कर दिया था अतः आक्रमण हुआ रामचंद्र ने समर्पण किया और दिल्ली गया वहां अलाउद्दीन ने मित्रवत व्यवहार कर उसे रायरायन की उपाधि दी साथ ही नवसारी जिला भेंट किया |
वारंगलप्रताप रुद्र देव (काकतीय शासक)1309 ईस्वीमलिक काफूरदेवगिरी ने काफ़ूर को सहायता दी और काफूर तेलंगाना की राजधानी पहुंच गया और शासक की सोने की मूर्ति और कोहिनूर हीरा तथा भारी मात्रा में लूट का माल लेकर लौटा |
द्वारसमुद्रवीर बल्लाल- III (होयसल वंश)1310 ईसवीमलिक काफूरदेवगिरी का सेनापति पारसदेव (परशुराम दलावे) काफूर की मदद के लिए साथ हो लिया | वीर बल्लाल स्वयं पांडय उत्तराधिकारी युद्ध में भाग लेने गया था बल्लाल ने समर्पण किया और काफूर के साथ दिल्ली गया अलाउद्दीन ने भव्य स्वागत किया |
पांडयवीर पांडय1311 ईस्वीमलिक काफूरकाफूर पांडय राज्य के उत्तराधिकार युद्ध में सुंदर पाण्ड्य के पक्ष में गया था | साथ में बीर बल्लाल भी था वीर पांडे भागता रहा यह अभियान लूट की दृष्टि से श्रेष्ठ था |
देवगिरीशंकरदेव (सिंघण II)1313 ईसवीमलिक काफूरसिंघण मारा गया और देवगिरी अधिकांशत: दिल्ली सल्तनत में शामिल कर लिया गया |

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