पंचायतों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया

पंचायतों के लिए निर्वाचन 



  • पंचायतों के लिए कराए जाने वाले चुनाव के लिए एक राज्यपाल निर्वाचन आयोग जिसकी नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाएगी |

  • यह आयोग पंचायतों के लिए चुनाव द्वारा पर्यवेक्षण निर्देशन नियंत्रण करता है| राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा शर्तें ऐसी होंगी जो राज्य का राज्यपाल निर्धारित करें तथा नियुक्ति के बाद सेवा शर्तों में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा |

  • राज्य निर्वाचन आयुक्त को साबित कदाचार के आधार पर ही पद से हटा सकते हैं तथा हटाने की विधि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की विधि जैसी होगी |





    1. 73 संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होने की तारीख (24 अप्रैल, 1993) से 1 वर्ष के अंदर सभी राज्यों को नई पंचायती राज प्रणाली को अपनाना होगा तथा पहले से गठित पंचायत अपने कार्यकाल की समाप्ति तक रहेगी, अगर राज्य द्वारा उन्हें भंग ना किया जाए |

    2. न्यायालय के हस्तक्षेप का वर्जन से तात्पर्य ऐसी विधि की मान्यता से है जो निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन, स्थानों का आवंटन से संबंधित मामले को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जाएगी |

    3. राज्य विधानमंडल पंचायतों के लेखओं की परीक्षा कर सकता है |







राज्य क्षेत्रों में पंचायत अधिनियम का लागू नहीं होना



  • यह अधिनियम मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र जहां जिला परिषद हो वहां, तथा मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और जम्मू कश्मीर तथा पश्चिमी बंगाल के दार्जिलिंग जिले के पर्वतीय क्षेत्र जहां दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद विद्यमान है, वहां लागू नहीं होंगे |

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