काल
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संस्कृति के लक्षण
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मुख्य स्थल
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महत्व उपकरण एवं विशेषताएं
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निम्न पुरापाषाण काल |
शल्क, गंडासा, खंडक, उपकरण, संस्कृति |
पंजाब, कश्मीर, सोहन घाटी, सिंगरौली घाटी, छोटा नागपुर, नर्मदा घाटी, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
हस्त कुठार एवं वाटिकाश्म उपकरण, होमो इरेक्टस के अस्थि अवशेष नर्मदा घाटी से प्राप्त हुए हैं | |
मध्य पुरापाषाण काल |
खुरचनी, वेधक संस्कृति |
नेवासा (महाराष्ट्र), डीडवाना (राजस्थान), भीमबेटका (मध्य प्रदेश) नर्मदा घाटी, बाकुंडा, पुरुलिया (पश्चिम बंग) |
फलक, बेधनी, भीमबेटका से गुफा चित्रकारी मिली है | |
उच्च पुरापाषाण काल |
फलक एवं तक्षिणी संस्कृति |
बेलन घाटी, छोटा नागपुर पठार, मध्य भारत, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
प्रारंभिक होमोसेपियंस मानव का काल, हार्पून, फलक एवं हड्डी के उपकरण प्राप्त हुए | |
मध्य पाषाण काल |
सुक्ष्म पाषाण संस्कृति |
आदमगढ़, भीमबेटका (मध्य प्रदेश), बागोर (राजस्थान), सराय नाहर राय (उत्तर प्रदेश) |
सूक्ष्म पाषाण उपकरण बढ़ाने की तकनीकी का विकास, अर्धचंद्राकार उपकरण, इकधार फलक, स्थाई निवास का साक्ष्य पशुपालन | |
नवपाषाण काल |
पॉलिश्ड़ उपकरण संस्कृति |
बुर्जहोम और गुफ्कराल लंघनाज(गुजरात), दमदमा (कश्मीर), कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश), चिरौंद (बिहार), पौयमपल्ली (तमिलनाडु), ब्रह्मगिरि, मस्की (कर्नाटक) |
प्रारंभिक कृषि संस्कृति, कपड़ा बनाना, भोजन पकाना, मृदभांड निर्माण, मनुष्य स्थाई निवास बना, पाषाण उपकरणों की पॉलिश शुरू, पहिया, अग्नि का प्रचलन | |
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